भारत का पहला कंजर्वेशन रिजर्व, आसन वेटलैंड, इन दिनों विदेशी पक्षियों और पर्यटकों से गुलज़ार है। विकासनगर की इस खूबसूरत झील पर मेहमान पक्षियों के स्वागत के लिए क्या खास इंतजाम किए गए हैं, आइए दिखाते हैं इस विशेष रिपोर्ट में…देहरादून से महज 40 किलोमीटर दूर, विकासनगर में बनी आसन बैराज की झील अब प्रवासी पक्षियों की चहल-पहल से जीवंत हो उठी है। सर्दियों की शुरुआत के साथ ही इन पक्षियों की चहचहाहट ने इस झील को और भी रंगीन बना दिया है। 2005 में देश का पहला कंजर्वेशन रिजर्व घोषित हुआ यह वेटलैंड, 2020 में उत्तराखंड का पहला रामसर साइट भी बना। इस समय यहाँ एक हज़ार से ज्यादा विदेशी पक्षी पहुँच चुके हैं, और इनका आना अभी भी जारी है। साइबेरिया, यूरोप, मध्य एशिया, चीन, नेपाल, भूटान और कजाकिस्तान जैसे ठंडे इलाकों से ये पक्षी हजारों किलोमीटर का सफर तय करके यहाँ आते हैं। ये मेहमान पक्षी हर साल आसन बैराज की इस झील को पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र बना देते हैं। वन विभाग भी इनके स्वागत में कोई कसर नहीं छोड़ रहा। पक्षियों की सुरक्षा और सुविधा के लिए झील के किनारे खास मड फ्लैट्स यानी कीचड़युक्त मैदान तैयार किए गए हैं, जहां ये पक्षी आराम करते और धूप सेंकते दिखते हैं। हर साल यहाँ करीब 240 प्रजातियों के प्रवासी पक्षी आते हैं, जिनमें सुरखाब, सीखपर, लाल चौंच, गुडगुडा, कुर्चिया बत्तख, सुर्खिया बगुला, बड़ा पन्न्काउआ, बयारी बत्तख, मलग बगुला और करचिया बगुला प्रमुख हैं। जैसे-जैसे इन पक्षियों का कुनबा बढ़ रहा है, वैसे-वैसे देश भर से पर्यटक इन खूबसूरत मेहमानों का दीदार करने आसन वेटलैंड पहुँच रहे हैं।

