आज हरिद्वार में प्रेस क्लब द्वारा आयोजित हिन्दी पत्रकारिता द्वि-शताब्दी समारोह में प्रतिभाग किया। 200 वर्षों की यह यात्रा हिंदी पत्रकारिता की गहराई, प्रतिबद्धता और लोकतांत्रिक चेतना का सशक्त प्रमाण है। ‘उदन्त मार्तण्ड’ से आरंभ हुई यह परंपरा आज भी सत्य, विवेक और मूल्यों के साथ जनहित को केंद्र में रखकर सत्ता से प्रश्न करने का साहस रखती है।

हिंदी केवल संवाद की भाषा नहीं, बल्कि भारत की संस्कृति, संवेदनाओं और आत्मा की अभिव्यक्ति है। हिंदी पत्रकारिता ने नारी सम्मान को सशक्त करने और सामाजिक सुधारों को गति देने में ऐतिहासिक भूमिका निभाई है। आज आवश्यकता है कि पत्रकार अपनी लेखनी के माध्यम से सकारात्मक सोच, जनजागरण और राष्ट्रहित के संदेश को व्यापक समाज तक पहुँचाएँ, ताकि लोकतंत्र और अधिक सशक्त एवं संवेदनशील बन सके।


मुझे विश्वास है कि हिंदी पत्रकारिता राष्ट्रनिर्माण, सामाजिक जागरण और भारत को 2047 तक विकसित, आत्मनिर्भर और विश्वगुरु बनाने की यात्रा में अपनी जिम्मेदारी पूरी निष्ठा और संकल्प के साथ निभाती रहेगी।


